शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमोक्ष-प्रदाता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जन्म-मृत्यु सहित सभी भौतिक बंधनों से मुक्त करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीमते नमः
ॐ नवनिधिप्रदाय नमः
ॐ करपूज्यायै नमः
बालार्कारुणकान्तिर्वामे बालां वहन् अङ्के । लसदिन्दीवर हस्तं गौराङ्गीं रत्नशोभाढ्याम् ॥ दक्षे अङ्कुश वरदानं वामे पाशं च पायसं पात्रम् । नीलांशुक समान पीठपद्मारुणे तिष्ठन् संकटहरणः पायात् ॥
ॐ ह्रीं ऐं महासरस्वति महासारस्वतप्रदे ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
ॐ ह्रीं हूं हां ग्रें क्षों क्रों नमः॥