शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ शुकवागमृताब्धीन्दवे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपभागवत-प्रतिपाद्य
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
शुकदेव जी की वाणी रूपी अमृत-सागर के चन्द्रमा को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वाक्-सिद्धि एवं विद्या
विस्तृत लाभ
वाक्-सिद्धि एवं विद्या
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥ 17
ॐ सहस्रार हुं फट् नमः
ॐ गजपतये हुं
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ वरारोहायै नमः
प्रतीच्यां उन्मत्त भैरवाय नमः प्रतीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।