शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
त्रिगुण-अतीत योग मंत्र
त्वं गुणत्रयातीतः ॥ त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः ॥ त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम् ॥ त्वं शक्तित्रयात्मकः ॥ त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम् ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारयोग-सिद्धि मंत्र
स्वरूपमूलाधार स्थित गणपति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
आप तीनों गुणों, तीनों शरीरों और तीनों कालों से परे हैं। आप नित्य मूलाधार चक्र में स्थित हैं। आप तीन शक्तियों वाले हैं और योगी नित्य आपका ध्यान करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कुंडलिनी जागरण, चक्रों का शुद्धिकरण और योग सिद्धि
विस्तृत लाभ
कुंडलिनी जागरण, चक्रों का शुद्धिकरण और योग सिद्धि।
जप काल
कुंडलिनी ध्यान और मूलाधार चक्र पर एकाग्रता के समय।
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