शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
यदा तमस्तन्न दिवा न रात्रिर्न सन्नचासच्छिव एव केवलः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जब कोई अंधकार नहीं था, न दिन था न रात, न सत् था न असत्, तब केवल एक 'शिव' ही थे
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