शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ सरस्वती मंत्र
ॐ यतये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसंन्यासी स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वयं यति (संन्यासी) रूप में वैराग्य के मूर्तिमान स्वरूप हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सांसारिक वासनाओं का शमन
02
ध्यान-मार्ग और संन्यास-भावना की प्रबलता
विस्तृत लाभ
सांसारिक वासनाओं का शमन; ध्यान-मार्ग और संन्यास-भावना की प्रबलता।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम्। दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ रघुपुङ्गवाय नमः
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
ॐ स्वर्णाकर्षणशीलाय नमः।
ॐ देवकीनन्दनाय नमः