वाग्देवी एकाग्रता मन्त्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
ज्ञान (ऐं), शक्ति (ह्रीं), और समृद्धि (श्रीं) की प्रदाता वाग्देवी सरस्वती को नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
स्मरण शक्ति, एकाग्रता, रचनात्मकता (Creativity) और ओजपूर्ण भाषण कला में अभूतपूर्व वृद्धि
विस्तृत लाभ
स्मरण शक्ति, एकाग्रता, रचनात्मकता (Creativity) और ओजपूर्ण भाषण कला में अभूतपूर्व वृद्धि।
जप काल
वसंत पंचमी के दिन विशेष रूप से अनुष्ठान या नित्य एक लाख जप से वाक्-सिद्धि।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नन्दिन्यै नमः
ॐ नाभिं मे पातु नरहरिः स्वनाभिब्रह्मसंस्तुतः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
ॐ करमालाकरप्रियायै नमः
षडाननं चन्दनलेपिताङ्गं महोरसं दिव्यमयूरवाहनम् । रुद्रस्य सूनुं सुरलोकनाथं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
ॐ चन्द्रावली पातु गण्डं।