शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ नाभिं मे पातु नरहरिः स्वनाभिब्रह्मसंस्तुतः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपनाभि / स्रष्टा स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी नाभि से उत्पन्न ब्रह्मा उनकी स्तुति करते हैं, वे नरहरि मेरी नाभि की रक्षा करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ आनन्दाय नमः
ॐ काशीश्वरकृतामोदायै नमः
ॐ मन्त्रकृते नमः
ईशान्यां संहार भैरवाय नमः ईशाने मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
आत्मनः शक्तिमुद्वीक्ष्य मानोत्साहौ तु यो व्रजेत्। शत्रूनेकोऽपि हन्याच्च क्षत्रियान् भार्गवो यथा॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः। आयुरारोग्यमैश्वर्यं तस्य पुण्यफलप्रदम्॥