शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ रसिकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपरसिक स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वयं सबसे बड़े रसिक हैं और प्रेम को ग्रहण करते हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता
02
रूखे और विवादित रिश्तों में प्रेम का संचार
विस्तृत लाभ
जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता; रूखे और विवादित रिश्तों में प्रेम का संचार।
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ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
उदीच्यां भीषण भैरवाय नमः उदीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ परस्मै नमः
ॐ उग्राय नमः
ॐ कृष्णवक्षस्थलस्थितायै नमः
ॐ वासुदेवाय नमः