शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ दुरन्ताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपअनंत स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका पार पाना या जिनके अंत तक पहुँचना असंभव (दुरंत) है, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विरोधियों द्वारा साधक की गहराई या शक्ति का अनुमान न लगा पाना
02
अजेयता
विस्तृत लाभ
विरोधियों द्वारा साधक की गहराई या शक्ति का अनुमान न लगा पाना; अजेयता।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सदाम्बिकायै स्वाहा वायव्ये मां सदाऽवतु। (अर्थ: सदाम्बिका देवी वायव्य कोण में रक्षा करें) 8
दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट स्वर्वाहिनी विमलचारुजलप्लुताङ्गीम्। प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम्॥
जाज्वल्यमानं सुरवृन्दवन्द्यं कुमारधारातटमन्दिरस्थम् । कन्दर्परूपं कमनीयगात्रं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा॥
ॐ विघ्नकर्त्रे नमः
ॐ महादेवाय नमः।