ईशान मंत्र (ऊर्ध्व मुख)
ईशानः सर्वविद्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपतिर्ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो सभी विद्याओं के स्वामी हैं, समस्त जीवों के ईश्वर हैं, ब्रह्मा के भी अधिपति हैं, वह सदाशिव मेरे लिए सर्वदा कल्याणकारी हों 36।
इस मंत्र से क्या होगा?
ज्ञान, विद्या, परमानंद और सर्वोच्च आध्यात्मिक सिद्धि की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
ज्ञान, विद्या, परमानंद और सर्वोच्च आध्यात्मिक सिद्धि की प्राप्ति 34।
जप काल
ऊर्ध्व (ऊपर की ओर) मुख या ईशान कोण में मुख करके।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ भविष्यच्चतुराननाय नमः
ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥
अनङ्गरङ्गमङ्गलप्रसङ्गभङ्गुरभ्रुवां सविभ्रमससम्भ्रमदृगन्तबाणपातनैः। निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ यक्षपूज्यायै नमः
ॐ कपालमालिने नमः।
त्वं गुणत्रयातीतः ॥ त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः ॥ त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम् ॥ त्वं शक्तित्रयात्मकः ॥ त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम् ॥