शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ अव्यग्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र (Nama-Mantras)।
स्वरूपशांत / अव्यग्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अत्यंत स्थिर हैं, कभी व्याकुल नहीं होते 70।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अत्यंत विपरीत परिस्थिति में भी स्थिरता
विस्तृत लाभ
अत्यंत विपरीत परिस्थिति में भी स्थिरता
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मत्ताय नमः
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
ॐ श्रीनिवासाय नमः
ॐ त्रिवृत्ततनयाय नमः।
ॐ गोपस्वामिने नमः
अनङ्गरङ्गमङ्गलप्रसङ्गभङ्गुरभ्रुवां सविभ्रमससम्भ्रमदृगन्तबाणपातनैः। निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥