एको रुद्र मंत्र
एको हि रुद्रो न द्वितीयाय तस्थुर् य इमांल्लोकानीशत ईशनीभिः।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
रुद्र वास्तव में एक ही हैं, कोई दूसरा नहीं है। वे ही अपनी शक्तियों से इन सभी लोकों पर शासन करते हैं 53।
इस मंत्र से क्या होगा?
द्वैत भाव का नाश और अद्वैत शिव-चेतना की जागृति
विस्तृत लाभ
द्वैत भाव का नाश और अद्वैत शिव-चेतना की जागृति 53।
जप काल
ज्ञान-साधना के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये विष्ण्विन्द्रादिदेवात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ ज्ञानदीपाय नमः
ॐ सर्वराजगृहेस्थितायै नमः
ॐ दिव्यहासायै नमः
ॐ क्रीं कालिकायै नमः॥