शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भूतगणाधिसेवित मंत्र
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम् । उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारशोकविनाशक मंत्र
स्वरूपविघ्नेश्वर / उमासुत
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका मुख हाथी के समान है, जो भूतगणों द्वारा सेवित हैं, जो कैथा और जामुन चाव से खाते हैं, जो उमा के पुत्र हैं और शोक का नाश करने वाले हैं, उन विघ्नेश्वर को मैं नमन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मानसिक शोक, अवसाद और असाध्य दुखों का शमन
विस्तृत लाभ
मानसिक शोक, अवसाद और असाध्य दुखों का शमन।
जप काल
घोर संकट या दुःख के समय करबद्ध होकर।
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