शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं वीर लक्ष्म्यै नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवीर (धैर्य) लक्ष्मी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
साहस और धैर्य की अधिष्ठात्री वीर-लक्ष्मी को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
असीम साहस, धैर्य, आंतरिक शक्ति, भयों का नाश
विस्तृत लाभ
असीम साहस, धैर्य, आंतरिक शक्ति, भयों का नाश 35।
जप काल
विपत्ति में लाल चंदन की माला से जप।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्
ॐ जितेन्द्रियाय नमः
ॐ ह्रीं बटुकाय मम कन्या विवाह बाधा निवारणं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
ॐ वासुदेवाय नमः
ॐ वैकुण्ठाय नमः