पंचकूट (षड-बीजात्मक) महामंत्र
ॐ ह्स्फ्रेँ ख्फ्रेँ ह्स्रौँ ह्स्ख्फ्रेँ ह्सौँ हनुमते नमः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
(यह पाँच कूट बीजाक्षरों का समूह है जो हनुमान जी की अतींद्रिय शक्तियों को ब्रह्मांडीय नाद के रूप में प्रकट करता है।)
इस मंत्र से क्या होगा?
यह मंत्र महोदधि का अत्यंत गुह्य मंत्र है
यह सभी प्रकार के तंत्र-मंत्र को काटने और महा-सिद्धियों को जाग्रत करने में सक्षम है
विस्तृत लाभ
यह मंत्र महोदधि का अत्यंत गुह्य मंत्र है। यह सभी प्रकार के तंत्र-मंत्र को काटने और महा-सिद्धियों को जाग्रत करने में सक्षम है 11।
जप काल
इसका विनियोग (Viniyoga) रामचन्द्र ऋषि और गायत्री छंद के साथ होता है। षडंग-न्यास के बिना इसका जप वर्जित है।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं आद्य लक्ष्म्यै नमः।
ॐ यज्ञतुष्टायै नमः
तप्तकाञ्चन संकाशश्चाष्टहस्तो महातनुः । दीप्ताङ्कुशं शरं चाक्षं दन्तं दक्षे वहन् करैः ॥ वामे पाशं कार्मुकं च लतां जम्बू दधत् करैः । रक्तांशुकः सदा भूयाद् दुर्गागणपतिर्मुदे ॥
ॐ शत्रुविनाशनाय नमः
रामोऽद्रिकूटेष्वथ विप्रवासे सानुजोऽव्याद् भरताग्रजो माम्
ॐ कपालार्घ्यवरोद्यतायै नमः