जय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानन्द श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्त वृन्द
जय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानन्द श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्त वृन्द
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
श्री कृष्ण चैतन्य, प्रभु नित्यानन्द, श्री अद्वैत, गदाधर, श्रीवास आदि सभी गौर-भक्तों की जय हो 14।
इस मंत्र से क्या होगा?
नाम-अपराधों का शमन और हरे कृष्ण महामन्त्र जपने की योग्यता एवं भगवत्-कृपा की त्वरित प्राप्ति
विस्तृत लाभ
नाम-अपराधों का शमन और हरे कृष्ण महामन्त्र जपने की योग्यता एवं भगवत्-कृपा की त्वरित प्राप्ति 14।
जप काल
गौड़ीय सम्प्रदाय में हरे कृष्ण महामन्त्र की माला आरम्भ करने से पूर्व इसका तीन बार स्पष्ट उच्चारण किया जाता है 14।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं बटुकाय मम पूर्ण तंत्र सिद्धिं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय।
करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः ॥ त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः ॥ त्वं सच्चिदानन्दाऽद्वितीयोऽसि ॥ त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि ॥ त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये दशावतारात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ मधुसूदनाय नमः
ॐ जामदग्निजाय नमः