शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ ज्वालाचक्राय स्वाहा – शिरसे स्वाहा
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशिर-न्यास / ज्वालाचक्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
ज्वाला-चक्र को स्वाहा, वे मेरे सिर पर स्थापित हों। (विचारों को नकारात्मकता से बचाना)।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
वियदीकारसंयुक्तं वीतिहोत्रसमन्वितम्। अर्धेन्दुलसितं देव्या बीजं सर्वार्थसाधकम्॥
ॐ युक्ताय नमः
पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥
यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात् विमुच्यते
ॐ प्रमुखाय नमः
अधो स्वर्णाकर्षण भैरवाय नमः अधो मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।