शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ कञ्जलोचनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपराजीव-लोचन
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
कमल (कंज) के समान नेत्रों वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
नेत्र-ज्योति हेतु
विस्तृत लाभ
नेत्र-ज्योति हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पाशाङ्कुश स्वदन्त आम्र फलवान् आखुवाहनः । विघ्नान् निहन्तु नः शोणः सृष्टिदक्षो विनायकः ॥
ॐ अजिताय नमः।
ॐ आञ्जनेयाय नमः
ॐ भकाररूपाय नमः
विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये महादेवतः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः