कर्पूरगौरं मंत्र (शिव स्तुति)
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात् अवतार हैं, संसार के सार हैं और सर्पों के राजा का हार पहनते हैं। जो सदा मेरे हृदय रूपी कमल में वास करते हैं, उन भवानी सहित भगवान शिव को मैं प्रणाम करता हूँ 16।
इस मंत्र से क्या होगा?
पारिवारिक शांति, दांपत्य सुख, और हृदय में शुद्धता व वैराग्य का संचार
विस्तृत लाभ
पारिवारिक शांति, दांपत्य सुख, और हृदय में शुद्धता व वैराग्य का संचार 16।
जप काल
शिव पूजा के अंत में आरती के समय सामूहिक या व्यक्तिगत गान।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कल्हारांबुज बीजपूरक गदा दन्तेक्षु बाणैः सदा बिभ्राणो मणिकुम्भ शालिकलशौ पाशं च चक्रान्वितम् । गौराङ्ग्या रुचिराविन्दकरया देव्या सदा संयुतः शोणाङ्कुश शुभमातनोतु भजतामुद्दण्डविघ्नेश्वरः ॥
ॐ महाडम्भाय नमः
ॐ धनुर्वेदाय नमः
ॐ दुष्टभूतनिषेविताय नमः।
ख्फ्रेँ ख्फ्रीँ चण्डे चण्डचामुण्डे ह्रीँ हूँ स्त्रीँ छ्रीँ विच्चे घोरे महामदोन्मनि क्लीँ ब्लूँ गुह्येश्वरि ॐ परानिर्वाणे ब्रह्मरूपिणि ॐ फ्रेँ फ्रेँ सिद्धिकरालि आप्यायिनि नवपञ्चचक्रनिलये घोराट्टराविणि कलासहस्रनिवासिनि खँ खँ खँ ह्सौँ फ्रेँ अवर्णेश्वरि प्रकृत्यपर शिवनिर्वाणदे ख्फ्रेँ स्वाहा॥
ॐ अव्यक्ताय नमः