शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कर्पूरगौरं मंत्र (शिव स्तुति)
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारस्तुति / आरती मंत्र
स्वरूपअर्धनारीश्वर / भवानी-शंकर
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात् अवतार हैं, संसार के सार हैं और सर्पों के राजा का हार पहनते हैं। जो सदा मेरे हृदय रूपी कमल में वास करते हैं, उन भवानी सहित भगवान शिव को मैं प्रणाम करता हूँ 16।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पारिवारिक शांति, दांपत्य सुख, और हृदय में शुद्धता व वैराग्य का संचार
विस्तृत लाभ
पारिवारिक शांति, दांपत्य सुख, और हृदय में शुद्धता व वैराग्य का संचार 16।
जप काल
शिव पूजा के अंत में आरती के समय सामूहिक या व्यक्तिगत गान।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र