शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ कीलिकायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
समस्त ब्रह्मांड की धुरी (कीलक) स्वरूपा को नमन 17।
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ॐ वरदविनायकाय नमः
जो अत्यंत तेजस्वी और महाप्रतापी हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: व्यक्तित्व में तेज और ओज की वृद्धि) 19।
ॐ गोवर्धनाचलोद्धर्त्रे नमः
ॐ शाश्वताय नमः
ॐ श्रीं ह्रीं जय लक्ष्मी प्रियाय नित्य प्रमुदित चेतसे लक्ष्मी स्रितार्थ देहाय श्रीं ह्रीं नमः
यँ यँ हनुमते फल फक्रिया हौत धग् धग् आयुरस्व प ख हेति फट्॥