शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
स्कंद स्तुति
ॐ नमः प्रणवार्थाय प्रणवार्थविधायिने । प्रणवाक्षरबीजाय प्रणवाय नमो नमः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्लोक 1
स्वरूपॐकार स्वरूप (स्वामिनाथ)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
प्रणव (ॐ) के अर्थ स्वरूप, प्रणव के विधानकर्ता और स्वयं प्रणव स्वरूप भगवान को नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
परब्रह्म के रहस्य का ज्ञान
विस्तृत लाभ
परब्रह्म के रहस्य का ज्ञान।
जप काल
गुरु दीक्षा या वेदाध्ययन से पूर्व।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गोप्यै नमः
ॐ वाग्देव्यै च विद्महे ब्रह्मपत्न्यै च धीमहि। तन्नो वाणी प्रचोदयात्॥
ॐ कपालमालिने नमः।
ॐ पद्मगन्धिन्यै नमः
ॐ अश्वारूढाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो कल्किः प्रचोदयात्।
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥