शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ पद्ममुख्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
कमल के समान खिले हुए मुखमंडल वाली देवी को नमन 57।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ व्यालोपतितात्मने नमः।
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8
ॐ त्रिवर्गस्वर्गसाधनाय नमः
ध्यायेच्च तामस क्षत्र रुधिर रक्त परश्वधम्। रक्त नेत्रं करस्थं ब्रह्म सूत्रं यम प्रभम्॥
ॐ मृडात्मजाय नमः
ॐ हरये नमः