शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
पंचमुखी हनुमान ध्यान मंत्र
पंचास्यमच्युतमनेकविचित्रवीर्यं श्रीशंखचक्ररमणीयभुजाग्रदेशम्। पीताम्बरं मकरकुण्डलनूपुराङ्गं ध्यायेतितं कपिवरं हृदि भावयामि॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारध्यान श्लोक / मंत्र
स्वरूपपंचमुखी हनुमान
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके पाँच मुख हैं, जो अच्युत (कभी न गिरने वाले) हैं, अनेक विचित्र शक्तियों के स्वामी हैं, जिनके हाथों में शंख-चक्र सुशोभित हैं, जिन्होंने पीताम्बर धारण किया है और मकर-कुंडल पहने हैं, मैं उन वानर श्रेष्ठ का अपने हृदय में ध्यान करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आलस्य और दरिद्रता का नाश होता है, ध्यान में अगाध एकाग्रता आती है और अतींद्रिय शक्तियों का जागरण होता है
विस्तृत लाभ
आलस्य और दरिद्रता का नाश होता है, ध्यान में अगाध एकाग्रता आती है और अतींद्रिय शक्तियों का जागरण होता है 34।
जप काल
पंचमुखी कवच पाठ से पूर्व हाथ में जल या पुष्प लेकर ध्यान।
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