शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ राक्षसामरगन्धर्वकोटिकोट्यभिवन्दिताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपत्रिलोक-पूज्य
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
राक्षसों, देवों और गंधर्वों द्वारा वंदित देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विविध पृष्ठभूमियों के लोगों का सहयोग
विस्तृत लाभ
विविध पृष्ठभूमियों के लोगों का सहयोग।
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अग्रतश्चतुरो वेदान् पृष्ठतः सशरं धनुः। उभाभ्यां च समर्थोऽहं शापादपि शरादपि॥
ॐ शान्ताय नमः।
ॐ श्रीं ह्रीं चामुण्डायै नमः
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥
ॐ दैत्यकुलान्तकाय नमः