शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
ब्रह्मा शिव अभेद मंत्र (कैवल्य)
स ब्रह्मा स शिवः स इन्द्रः सोऽक्षरः परमः स्वराट्। स एव विष्णुः स प्राणः स कालोऽग्निः स चन्द्रमाः॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअद्वैत दर्शन मंत्र
स्वरूपपरब्रह्म
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वे शिव ही ब्रह्मा हैं, वे ही इन्द्र हैं, वे ही विष्णु हैं, वे ही प्राण, अग्नि, काल और चन्द्रमा हैं 52।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सांप्रदायिक भेदों का नाश और ब्रह्मांडीय एकता का बोध
विस्तृत लाभ
सांप्रदायिक भेदों का नाश और ब्रह्मांडीय एकता का बोध 52।
जप काल
वेदांत श्रवण के बाद।
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