शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सद्योजात मंत्र (पश्चिम मुख)
सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः। भवे भवे नातिभवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारपंचब्रह्म उपासना मंत्र
स्वरूपसद्योजात (सृष्टिकर्ता स्वरूप, पृथ्वी तत्त्व)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मैं सद्योजात (नवोत्पन्न) की शरण में हूँ। सद्योजात को मेरा बारंबार नमन। हे भगवान! मुझे जन्म-जन्मांतर के संसार-चक्र से मुक्त करें और मोक्ष प्रदान करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
नवजीवन, नवीन कार्यों में सफलता, और जन्म-मरण के चक्र (संसार) से मोक्ष की लालसा की जागृति
विस्तृत लाभ
नवजीवन, नवीन कार्यों में सफलता, और जन्म-मरण के चक्र (संसार) से मोक्ष की लालसा की जागृति 21।
जप काल
पश्चिम दिशा की ओर मुख करके।
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