शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सर्वव्यापी शिव मंत्र
सर्वाननशिरोग्रीवः सर्वभूतगुहाशयः। सर्वव्यापी स भगवांस्तस्मात् सर्वगतः शिवः॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारऔपनिषदिक स्तुति
स्वरूपसर्वव्यापी शिव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सभी दिशाओं में मुख, सिर और ग्रीवा वाले, सभी जीवों के हृदय-गुहा में शयन करने वाले, वे भगवान शिव सर्वव्यापी हैं 51।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कण-कण में ईश्वर की अनुभूति और समदृष्टि का विकास
विस्तृत लाभ
कण-कण में ईश्वर की अनुभूति और समदृष्टि का विकास 51।
जप काल
मानसिक चिंतन।
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