ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

सर्वव्यापी शिव मंत्र

सर्वाननशिरोग्रीवः सर्वभूतगुहाशयः। सर्वव्यापी स भगवांस्तस्मात् सर्वगतः शिवः॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारऔपनिषदिक स्तुति
स्वरूपसर्वव्यापी शिव
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

सभी दिशाओं में मुख, सिर और ग्रीवा वाले, सभी जीवों के हृदय-गुहा में शयन करने वाले, वे भगवान शिव सर्वव्यापी हैं 51।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

कण-कण में ईश्वर की अनुभूति और समदृष्टि का विकास

विस्तृत लाभ

कण-कण में ईश्वर की अनुभूति और समदृष्टि का विकास 51।

जप काल

मानसिक चिंतन।

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