शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
श्रीमन् नारायण चरणौ शरणं प्रपद्ये। श्रीमते नारायणाय नमः॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारद्वय मंत्र (रहस्य त्रय)
स्वरूपलक्ष्मी-नारायण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मैं श्री (लक्ष्मी) से युक्त नारायण के चरण कमलों की शरण लेता हूँ। उन श्रीमान नारायण को मेरा नमन है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भगवान की अहैतुकी कृपा, अहंकार शून्यता और शाश्वत कैंकर्य (सेवा) की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
भगवान की अहैतुकी कृपा, अहंकार शून्यता और शाश्वत कैंकर्य (सेवा) की प्राप्ति 49।
जप काल
श्रीवैष्णव संप्रदाय में नित्य प्रपत्ति साधना के अंतर्गत।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र