शिव मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं धान्य लक्ष्म्यै नमः।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
अन्न और पोषण प्रदान करने वाली धान्य-लक्ष्मी को नमस्कार।
इस मंत्र से क्या होगा?
कृषि में लाभ, अन्नपूर्णा का वास, उत्तम स्वास्थ्य
विस्तृत लाभ
कृषि में लाभ, अन्नपूर्णा का वास, उत्तम स्वास्थ्य 36।
जप काल
रसोई घर या अन्न भंडारण के स्थान पर जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ हृषीकेशाय नमः
ॐ वराहमूर्तिमते नमः
ॐ कंसप्रध्वंसकारिणे नमः
अहं राष्ट्री सङ्गमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्। तां मा देवा व्यदधुः पुरुत्रा भूरिस्थात्रां भूर्यावेशयन्तीम्॥
आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम्। लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।