शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
ॐ सँ कम् रम् सँ रम् हुं फट् सहस्रार हुं फट्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपबीजाक्षर अस्त्र मंत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
'सम्', 'कम्', 'रम्' आदि सुदर्शन के तांत्रिक बीज हैं। यह मंत्र नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर साधक के इर्द-गिर्द अग्नि-प्राचीर बनाता है।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कृष्णप्राणेश्वर्यै नमः
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महासेनाय धीमहि तन्नः षण्मुखः प्रचोदयात्
ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8
ॐ विकृत्यै नमः
ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः
ॐ सिद्धाय नमः।