शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं। मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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टिप्पणी
गौरीशंकर - सौंदर्य और शांति
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कर्पूरसागरस्नातायै नमः
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
ॐ भद्राय नमः
ॐ नमः प्रणवार्थाय प्रणवार्थविधायिने । प्रणवाक्षरबीजाय प्रणवाय नमो नमः ॥
ॐ जितामित्राय नमः