शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शिव मंत्र
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं। मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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टिप्पणी
गौरीशंकर - सौंदर्य और शांति
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ करदायै नमः
ॐ स्कन्दाय नमः
भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम्। तर्जनं यमदूतानां राम रामेति गर्जनम्॥
लम्बोदरं श्यामं तनुं गणेशं कुठारमक्षस्रजं ऊर्ध्वगाभ्याम् । सालद्रुङ्गं दन्तमधः कराभ्यां वामेतराभ्यां च दधानमीडे ॥
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
ॐ वेदत्रयप्रपूज्याय नमः