शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शर-धनुष शमन मंत्र
यामिषुं गिरिशन्त हस्ते बिभर्ष्यस्तवे। शिवां गिरित्र तां कुरु मा हिंसीः पुरुषं जगत्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक रक्षा मंत्र
स्वरूपगिरित्र (पर्वतों के रक्षक)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे कैलाश निवासी और रक्षक! आपने शत्रुओं को मारने के लिए जो बाण हाथ में लिया है, उसे शांत करें। हमारे लोगों और संसार का विनाश न करें 38।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
युद्ध, अस्त्र-शस्त्रों के प्रहार और महामारी से लोगों की रक्षा
विस्तृत लाभ
युद्ध, अस्त्र-शस्त्रों के प्रहार और महामारी से लोगों की रक्षा 37।
जप काल
समाज या राष्ट्र पर संकट आने पर।
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