श्री हनुमत् गायत्री मंत्र
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हम माता अंजना के पुत्र को जानते हैं, उन वायुपुत्र का हम ध्यान करते हैं। वे भगवान हनुमान हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञान और अंधकार का नाश, आत्म-बल में वृद्धि, अष्टसिद्धि (अणिमा, महिमा आदि) की प्राप्ति और बौद्धिक कुशाग्रता
विस्तृत लाभ
अज्ञान और अंधकार का नाश, आत्म-बल में वृद्धि, अष्टसिद्धि (अणिमा, महिमा आदि) की प्राप्ति और बौद्धिक कुशाग्रता 25।
जप काल
प्रातःकाल सूर्योदय के समय, सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात मानसिक जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सुरसैन्यसुरक्षकाय नमः
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)
ॐ अष्टमूर्तये नमः
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं मनसा देव्यै स्वाहा।
ॐ विष्णवे नमः
ॐ द्विरूपभृते नमः