शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ भयापहाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपअभय-प्रदाता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सभी प्रकार के भय को दूर करने वाले को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दुःस्वप्नों, मृत्यु-भय और असुरक्षा की भावना का अंत
विस्तृत लाभ
दुःस्वप्नों, मृत्यु-भय और असुरक्षा की भावना का अंत।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सिंधु-तरन, सिय-सोच-हरन, रबि-बाल-बरन तनु। भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं वद वद वाग्वादिनी मम जिह्वाग्रे सरस्वती स्वाहा।
ह्रीं भैरव भयंकरहर मां रक्ष-रक्ष हुं फट् स्वाहा।
ॐ उदरं सुबलस्वसा पातु।
काली कराली च मनोजवा च सुलोहिता या च सुधूम्रवर्णा। स्फुलिङ्गिनी विश्वरुची च देवी लेलायमाना इति सप्त जिह्वाः॥
ॐ शुभविग्रहाय नमः