विष्णु मंत्र
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्। ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो सुगंध से प्राप्त होती हैं, नित्य पुष्ट हैं और पशुधन से युक्त हैं, उन समस्त प्राणियों की स्वामिनी का मैं आवाहन करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
कृषि, भूमि और गंध-पुष्पादि की वृद्धि
विस्तृत लाभ
कृषि, भूमि और गंध-पुष्पादि की वृद्धि।
जप काल
भूमि पूजन के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पाशाङ्कुश स्वदन्त आम्र फलवान् आखुवाहनः । विघ्नान् निहन्तु नः शोणः सृष्टिदक्षो विनायकः ॥
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
भजे विशेषासुन्दरं समस्तपापखण्डनम्...
ॐ गीतामृतमहोदधये नमः
ॐ नमस्ते रुद्र मन्यव उतोत इषवे नमः। नमस्ते अस्तु धन्वने बाहुभ्यामुत ते नमः॥
ॐ नमो आदेश गुरु को, सोने का कड़ा, तांबे का कड़ा, हनुमान वनगरेया सजे मोंढे आन खड़ा। शब्द सांचा पिंड काचा, फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।