शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ गुणभद्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपशान्त स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अनंत उत्तम गुणों से भद्र (युक्त) हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
साधक के चरित्र में ईश्वरीय सद्गुणों (क्षमा, दया, सत्य) का समावेश
विस्तृत लाभ
साधक के चरित्र में ईश्वरीय सद्गुणों (क्षमा, दया, सत्य) का समावेश।
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ॐ गोवर्धनधनप्रियायै नमः
ॐ सूक्ष्मायै नमः
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ शुकवागमृताब्धीन्दवे नमः
ॐ नमो भगवते संहार भैरवाय भूत प्रेत पिशाच ब्रह्म राक्षसान् उच्चाटय उच्चाटय संहारय संहारय सर्व भय छेदनं कुरु कुरु स्वाहा।
राम (अथवा ॐ रां)