शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ कृष्णप्रेमतरङ्गिण्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो कृष्ण प्रेम की बहती हुई तरंग हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आध्यात्मिक भाव-समाधि
विस्तृत लाभ
आध्यात्मिक भाव-समाधि।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अनादिनिधनाय नमः
ॐ श्री वज्रदेहाय रामभक्ताय वायुपुत्राय नमोऽस्तुते॥
पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
अगजानन पद्मार्कं गजाननमहर्निशम् । अनेकदन्तं भक्तानाम् एकदन्तमुपास्महे ॥
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
ॐ पञ्चवक्त्राय नमः