शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ महानन्दिने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपब्रह्मानन्द
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
महान आनन्द प्रदान करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
समाधि और ध्यान सिद्धि
विस्तृत लाभ
समाधि और ध्यान सिद्धि
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्गैः। अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः॥
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
ॐ घनश्यामाय नमः
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना। हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण॥ भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना। सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥
वेल् वेल् वेत्रिवेल् मुरुगनुक्कु अरोहरा
ॐ कौलिकाराध्यायै नमः