शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ पवित्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपपरम शुद्ध
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वभाव और कर्म से अत्यंत पवित्र हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पाप क्षय
विस्तृत लाभ
पाप क्षय
जप काल
स्नानोपरांत
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वसुप्रदायै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं सर्व विघ्न निवारणाय महा क्रोध भैरवाय नमः।
ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8
नारिकेलानम्र कदली गुड पायस धारिणम् । शरच्चन्द्र वपुषं भजे भक्त गणपतिम् ॥
ॐ कृषाणवे नमः
ईशानः सर्वविद्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपतिर्ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम्॥