शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ प्रसादाभिमुख्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
कृपा (प्रसाद) करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाली देवी को नमन 16।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्॥
ॐ परमेश्वराय नमः
ॐ सर्वविद्यासम्पत्प्रदायकाय नमः
ॐ क्लैब्यनाशिन्यै नमः
ॐ आदिपुरुषाय नमः