विष्णु मंत्र
रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोद्धृतधरो वराहः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
यज्ञस्वरूप भगवान वराह, जिन्होंने अपनी दाढ़ पर पृथ्वी को उठाया था, वे मार्ग में मेरी रक्षा करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
मार्ग में आने वाली बाधाओं और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव
विस्तृत लाभ
मार्ग में आने वाली बाधाओं और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव 61।
जप काल
किसी भी महत्वपूर्ण प्रस्थान के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥
ॐ शिं रैं स्वतन्त्रशक्तिधाम्ने वामदेवात्मने अनामिकाभ्यां नमः
ॐ आं ह्रीं क्रों सहस्रार हुं फट् स्वाहा
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥ 18
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये सर्वभूतात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ भकाररूपाय नमः