शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोद्धृतधरो वराहः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनारायण कवच रक्षा-मंत्र
स्वरूपयज्ञ-वराह
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
यज्ञस्वरूप भगवान वराह, जिन्होंने अपनी दाढ़ पर पृथ्वी को उठाया था, वे मार्ग में मेरी रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मार्ग में आने वाली बाधाओं और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव
विस्तृत लाभ
मार्ग में आने वाली बाधाओं और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव 61।
जप काल
किसी भी महत्वपूर्ण प्रस्थान के समय।
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