शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ सर्वमायाविभञ्जनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमाया-नाशक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सभी प्रकार के सांसारिक भ्रम और माया को तोड़ने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके। मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय॥
बिभ्राणः शुक बीजपूर कमलं माणिक्यकुम्भं अङ्कुशं पाशं कल्पलतां च खड्ग विलसत् ज्योतिः सुधानिर्झरः । श्यामेनात्त सरोरुहेण सहितो देवीद्वयेनान्तिके गौराङ्गो वरदान हस्त कमलो लक्ष्मीगणेशोऽवतात् ॥
ॐ वाग्मिने नमः
ॐ विष्णवे नमः (नारायण कवच हृदयादि न्यास)
ॐ धनुर्धराय नमः
ॐ शूलपाणये नमः।