शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ सर्वविद्याधिपः पातु नृसिंहो रसनां मम
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपजिह्वा (वाणी) / ज्ञान स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सर्वविद्या के अधिपति मेरी जिह्वा की रक्षा करें। (वाक्-सिद्धि एवं सत्य-वचन की प्राप्ति)।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥ 18
ॐ अन्तःकरणवासिन्यै नमः
ॐ कर्पूरसागरालयायै नमः
ॐ हस्तिपिशाचिलिखे स्वाहा ॥
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
जो अदम्य साहस वाले परम वीर हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: साहस और निर्भयता) 19।