शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ वरप्रदाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपप्रह्लाद-वरद
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अपने योग्य भक्तों को वरदान देने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
साधक की सभी सात्विक और मनोवांछित इच्छाओं की पूर्ति
विस्तृत लाभ
साधक की सभी सात्विक और मनोवांछित इच्छाओं की पूर्ति।
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नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्॥
ॐ करामर्षायै नमः
ॐ रावणेशस्तोत्रसाममनोहराय नमः
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8
वीणां कल्पलतां अरिं च वरदं दक्षे विदत्ते करैः वामे तामरसं च रत्नकलशं सन्मञ्जरीं चाभयम् । शुण्डादण्ड लसन्मृगेन्द्रवदनः शङ्खेन्दुगौरः शुभो दीव्यद्रत्ननिभांशुकः गणपतिः पायादपायात्स नः ॥
ॐ ओङ्काररूपिण्यै देव्यै नमः