शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
विष्णु मंत्र
ॐ वेदमन्त्राभिषेचिताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारयुगल-नाम मन्त्र; ये मन्त्र गोलोक धाम के अधिष्ठाता श्री राधा-कृष्ण के संयुक्त लीला-माधुर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपवेद-स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जन्म के पश्चात् वेदमन्त्रों द्वारा जिनका अभिषेक हुआ, उन्हें नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
यज्ञ-अनुष्ठान सफलता
विस्तृत लाभ
यज्ञ-अनुष्ठान सफलता
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ दयासाराय नमः
ॐ नरसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नरसिंहः प्रचोदयात्।
ॐ ह्रीं बटुकाय मम प्रत्यक्ष दर्शय दर्शय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
हस्तीन्द्राननमिन्दुचूडमरुणच्छायं त्रिनेत्रं रसात् आलिष्टं प्रियया सपद्मकरया स्वाङ्कस्थया सन्ततम् । बीजपूर गदेक्षु कार्मुकलसच्चक्राब्ज पाशोत्पल व्रीह्यग्रस्वविषाण रत्नकलशान् हस्तैर्वहन्तं भजे ॥
ॐ द्विषड्भुजाय नमः
ॐ कमलाकुञ्जवासिन्यै नमः