शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह (नरसिंह) गायत्री मंत्र
ॐ नरसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नरसिंहः प्रचोदयात्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपउग्र नृसिंह
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम वज्र के समान नखों वाले भगवान नरसिंह का ध्यान करते हैं; वे हमारी रक्षा करते हुए हमें प्रेरित करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
साहस, वीरता की वृद्धि और अचानक आने वाले अज्ञात भय का नाश
विस्तृत लाभ
साहस, वीरता की वृद्धि और अचानक आने वाले अज्ञात भय का नाश 11।
जप काल
सायं गोधूलि वेला।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीमते नमः
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
ॐ वेदवेद्याय नमः
ॐ सर्वलोकचारिणे नमः
ॐ कराल-वदनां घोरां मुक्त-केशीं चतुर्भुजाम्। कालिकां दक्षिणां दिव्यां मुण्ड-माला विभूषिताम्। सद्यः-छिन्न-शिरः-खड्ग-वामाधोर्ध्व-कराम्बुजाम्। अभयं वरदञ्चैव दक्षिणोर्ध्वाधः-पाणिकाम्॥
ॐ लक्ष्याय नमः।