भागवत (5.24.16) श्लोक का तात्विक अर्थ क्या है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
भागवत (5.24.16) का तात्विक अर्थ — भौतिक भोग (हाटक रस) व्यक्ति में मिथ्या अहंकार जगाता है। वह ईश्वर समझने लगता है जबकि यह आत्मज्ञान का सबसे बड़ा पतन है।
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