दान क्या है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
दान = श्रेष्ठ पात्र को, उचित समय पर, बिना स्वार्थ के देना। गरुड़ पुराण में 'वितरण' (वि+तरण) कहा गया है — देने से ही वैतरणी पार होती है। भूलोक, भुवर्लोक और देवलोक सभी दान से तृप्त होते हैं।
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