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सरल उत्तर

गीता में कर्म योग क्या है?

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कर्म योग = फल की आसक्ति त्याग कर कर्तव्य-पालन। 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' (2.47)। कोई एक क्षण कर्म-रहित नहीं रह सकता। निष्काम कर्म = मुक्ति। सकाम कर्म = बंधन। 'योगः कर्मसु कौशलम्' — कर्म में कुशलता ही योग।

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