ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
सरल उत्तर

जनक की निराशाजनक वाणी सुनकर लक्ष्मणजी को कैसा लगा?

का सरल उत्तर

सरल उत्तर

लक्ष्मणजी को बड़ा क्रोध आया — रघुकुल का अपमान समझा। कहा — आज्ञा हो तो ब्रह्माण्ड गेंद-सा उठा लूँ, मेरु पर्वत मूली-सा तोड़ दूँ, कच्चे घड़े-सा फोड़ दूँ — यह पुराना धनुष तो क्या चीज़ है!

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रामचरितमानस — बालकाण्ड

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